एकश्लोकि रामायणम् २
रामादौ जननं कुमारगमनं यज्ञप्रतीपालनं
शापादुद्धरणं धनुर्विदलनं सीताङ्गनोद्वाहनम् ।
लङ्काया दहनं समुद्रतरणं सौमित्रिसम्मोहनं
रक्षः संहरणं स्वराज्यभवनं चैतद्धि रामायणम् ॥
इति एकश्लोकि रामायणं (२) सम्पूर्णम् ॥
କୁଲରରେ ପାଣି ମିଶାଇଲେ ଥଣ୍ଡା ପବନ କାହିଁକି ଉତ୍ପନ୍ନ ହୁଏ ? ଗ୍ରୀଷ୍ମ ଋତୁରେ, ଯେତେବେଳେ ଆମେ କୁଲରକୁ ଚାଲୁ କରି ପାଣି ମିଶାଇଥାଉ, ଅଳ୍ପ ସମୟ ମଧ୍ୟରେ କୁଲରରୁ ଥଣ୍ଡା ...
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