मंगलवार, 20 अप्रैल 2021

एकश्लोकि रामायणम् ३

 

एकश्लोकि रामायणम् ३

जन्मादौ क्रतुरक्षणं मुनिपतेः स्थाणोर्धनुर्भञ्जनं वैदेहीग्रहणं पितुश्च वचनाद्घोराटवीगाहनम् । कोदण्डग्रहणं खरादिमथनं मायामृगच्छेदनं बद्धाब्धिक्रमणं दशास्यनिधनं चैतद्धि रामायणम् ॥ इति एकश्लोकि रामायणं (३) सम्पूर्णम् ॥

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