श्री दुर्गा सप्तशति बीजमंत्रात्मक साधना..
ॐ श्री गणेशाय नमः [११ बार]
ॐ ह्रों जुं सः सिद्ध गुरूवे नमः [११ बार]
ॐ दुर्गे दुर्गे रक्ष्णी ठः ठः स्वाहः [१३ बार]
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामण्डायै विच्चे | ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः
ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै
ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा ||
नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दीनि | नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दीनि ||
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भसुरघातिनि | जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे ||
ऐंकारी सृष्टीरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका | क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोस्तुते ||
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी | विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणि ||
धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी | क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुंभ कुरू ||
हुं हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी | भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रै भवान्यै ते नमो नमः ||
अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं | धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा ||
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा | सां सीं सूं सप्तशती देव्या मन्त्रसिद्धिं कुरुष्व मे ||
|ॐ नमश्चण्डिकायैः|ॐ श्री दुर्गार्पणमस्तु||
प्रथमचरित्र...
ॐ अस्य श्री प्रथमचरित्रस्य ब्रह्मा रूषिः महाकाली देवता गायत्री छन्दः नन्दा शक्तिः रक्तदन्तिका बीजम् अग्निस्तत्त्वम् रूग्वेद स्वरूपम् श्रीमहाकाली प्रीत्यर्थे प्रथमचरित्र जपे विनियोगः|
(१) श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं प्रीं ह्रां ह्रीं सौं प्रें म्रें ल्ह्रीं म्लीं स्त्रीं क्रां स्ल्हीं क्रीं चां भें क्रीं वैं ह्रौं युं जुं हं शं रौं यं विं वैं चें ह्रीं क्रं सं कं श्रीं त्रों स्त्रां ज्यैं रौं द्रां द्रों ह्रां द्रूं शां म्रीं श्रौं जूं ल्ह्रूं श्रूं प्रीं रं वं व्रीं ब्लूं स्त्रौं ब्लां लूं सां रौं हसौं क्रूं शौं श्रौं वं त्रूं क्रौं क्लूं क्लीं श्रीं व्लूं ठां ठ्रीं स्त्रां स्लूं क्रैं च्रां फ्रां जीं लूं स्लूं नों स्त्रीं प्रूं स्त्रूं ज्रां वौं ओं श्रौं रीं रूं क्लीं दुं ह्रीं गूं लां ह्रां गं ऐं श्रौं जूं डें श्रौं छ्रां क्लीं
|ॐ नमश्चण्डिकायैः|ॐ श्री दुर्गार्पणमस्तु||
मध्यमचरित्र..
ॐ अस्य श्री मध्यमचरित्रस्य विष्णुर्रूषिः महालक्ष्मीर्देवता उष्णिक छन्दः शाकम्भरी शक्तिः दुर्गा बीजम् वायुस्तत्त्वम् यजुर्वेदः स्वरूपम् श्रीमहालक्ष्मी प्रीत्यर्थे मध्यमचरित्र जपे विनियोगः
(२) श्रौं श्रीं ह्सूं हौं ह्रीं अं क्लीं चां मुं डां यैं विं च्चें ईं सौं व्रां त्रौं लूं वं ह्रां क्रीं सौं यं ऐं मूं सः हं सं सों शं हं ह्रौं म्लीं यूं त्रूं स्त्रीं आं प्रें शं ह्रां स्मूं ऊं गूं व्र्यूं ह्रूं भैं ह्रां क्रूं मूं ल्ह्रीं श्रां द्रूं द्व्रूं ह्सौं क्रां स्हौं म्लूं श्रीं गैं क्रूं त्रीं क्ष्फीं क्सीं फ्रों ह्रीं शां क्ष्म्रीं रों डुं
|ॐ नमश्चण्डिकायैः|ॐ श्री दुर्गार्पणमस्तु||
(३) श्रौं क्लीं सां त्रों प्रूं ग्लौं क्रौं व्रीं स्लीं ह्रीं हौं श्रां ग्रीं क्रूं क्रीं यां द्लूं द्रूं क्षं ह्रीं क्रौं क्ष्म्ल्रीं वां श्रूं ग्लूं ल्रीं प्रें हूं ह्रौं दें नूं आं फ्रां प्रीं दं फ्रीं ह्रीं गूं श्रौं सां श्रीं जुं हं सं
|ॐ नमश्चण्डिकायैः|ॐ श्री दुर्गार्पणमस्तु||
(४) श्रौं सौं दीं प्रें यां रूं भं सूं श्रां औं लूं डूं जूं धूं त्रें ल्हीं श्रीं ईं ह्रां ल्ह्रूं क्लूं क्रां लूं फ्रें क्रीं म्लूं घ्रें श्रौं ह्रौं व्रीं ह्रीं त्रौं हलौं गीं यूं ल्हीं ल्हूं श्रौं ओं अं म्हौं प्री
|ॐ नमश्चण्डिकायैः|ॐ श्री दुर्गार्पणमस्तु||
उत्तमचरित्र..
ॐ अस्य श्री उत्तरचरित्रस्य रुद्र रूषिः महासरस्वती देवता अनुष्टुप् छन्दः भीमा शक्तिः भ्रामरी बीजम सूर्यस्तत्त्वम सामवेदः स्वरूपम श्री महासरस्वती प्रीत्यर्थे उत्तरचरित्र जपे विनियोगः
(५) श्रौं प्रीं ओं ह्रीं ल्रीं त्रों क्रीं ह्लौं ह्रीं श्रीं हूं क्लीं रौं स्त्रीं म्लीं प्लूं ह्सौं स्त्रीं ग्लूं व्रीं सौः लूं ल्लूं द्रां क्सां क्ष्म्रीं ग्लौं स्कं त्रूं स्क्लूं क्रौं च्छ्रीं म्लूं क्लूं शां ल्हीं स्त्रूं ल्लीं लीं सं लूं हस्त्रूं श्रूं जूं हस्ल्रीं स्कीं क्लां श्रूं हं ह्लीं क्स्त्रूं द्रौं क्लूं गां सं ल्स्त्रां फ्रीं स्लां ल्लूं फ्रें ओं स्म्लीं ह्रां ऊं ल्हूं हूं नं स्त्रां वं मं म्क्लीं शां लं भैं ल्लूं हौं ईं चें क्ल्रीं ल्ह्रीं क्ष्म्ल्रीं पूं श्रौं ह्रौं भ्रूं क्स्त्रीं आं क्रूं त्रूं डूं जां ल्ह्रूं फ्रौं क्रौं किं ग्लूं छ्रंक्लीं रं क्सैं स्हुं श्रौं श्रीं ओं लूं ल्हूं ल्लूं स्क्रीं स्स्त्रौं स्भ्रूं क्ष्मक्लीं व्रीं सीं भूं लां श्रौं स्हैं ह्रीं श्रीं फ्रें रूं च्छ्रूं ल्हूं कं द्रें श्रीं सां ह्रौं ऐं स्कीं
|ॐ नमश्चण्डिकायैः|ॐ श्री दुर्गार्पणमस्तु||
(६) श्रौं ओं त्रूं ह्रौं क्रौं श्रौं त्रीं क्लीं प्रीं ह्रीं ह्रौं श्रौं अरैं अरौं श्रीं क्रां हूं छ्रां क्ष्मक्ल्रीं ल्लुं सौः ह्लौं क्रूं सौं
|ॐ नमश्चण्डिकायैः|ॐ श्री दुर्गार्पणमस्तु||
(७) श्रौं कुं ल्हीं ह्रं मूं त्रौं ह्रौं ओं ह्सूं क्लूं क्रें नें लूं ह्स्लीं प्लूं शां स्लूं प्लीं प्रें अं औं म्ल्रीं श्रां सौं श्रौं प्रीं हस्व्रीं
|ॐ नमश्चण्डिकायैः|ॐ श्री दुर्गार्पणमस्तु||
(८) श्रौं म्हल्रीं प्रूं एं क्रों ईं एं ल्रीं फ्रौं म्लूं नों हूं फ्रौं ग्लौं स्मौं सौं स्हों श्रीं ख्सें क्ष्म्लीं ल्सीं ह्रौं वीं लूं व्लीं त्स्त्रों ब्रूं श्क्लीं श्रूं ह्रीं शीं क्लीं फ्रूं क्लौं ह्रूं क्लूं तीं म्लूं हं स्लूं औं ल्हौं श्ल्रीं यां थ्लीं ल्हीं ग्लौं ह्रौं प्रां क्रीं क्लीं न्स्लुं हीं ह्लौं ह्रैं भ्रं सौं श्रीं प्सूं द्रौं स्स्त्रां ह्स्लीं स्ल्ल्रीं
|ॐ नमश्चण्डिकायैः|ॐ श्री दुर्गार्पणमस्तु||
(९) रौं क्लीं म्लौं श्रौं ग्लीं ह्रौं ह्सौं ईं ब्रूं श्रां लूं आं श्रीं क्रौं प्रूं क्लीं भ्रूं ह्रौं क्रीं म्लीं ग्लौं ह्सूं प्लीं ह्रौं ह्स्त्रां स्हौं ल्लूं क्स्लीं श्रीं स्तूं च्रें वीं क्ष्लूं श्लूं क्रूं क्रां स्क्ष्लीं भ्रूं ह्रौं क्रां फ्रूं
|ॐ नमश्चण्डिकायैः|ॐ श्री दुर्गार्पणमस्तु||
(१०) श्रौं ह्रीं ब्लूं ह्रीं म्लूं ह्रं ह्रीं ग्लीं श्रौं धूं हुं द्रौं श्रीं त्रों व्रूं फ्रें ह्रां जुं सौः स्लौं प्रें हस्वां प्रीं फ्रां क्रीं श्रीं क्रां सः क्लीं व्रें इं ज्स्हल्रीं
|ॐ नमश्चण्डिकायैः|ॐ श्री दुर्गार्पणमस्तु||
(११) श्रौं क्रूं श्रीं ल्लीं प्रें सौः स्हौं श्रूं क्लीं स्क्लीं प्रीं ग्लौं ह्स्ह्रीं स्तौं लीं म्लीं स्तूं ज्स्ह्रीं फ्रूं क्रूं ह्रौं ल्लूं क्ष्म्रीं श्रूं ईं जुं त्रैं द्रूं ह्रौं क्लीं सूं हौं श्व्रं ब्रूं स्फ्रूं ह्रीं लं ह्सौं सें ह्रीं ल्हीं विं प्लीं क्ष्म्क्लीं त्स्त्रां प्रं म्लीं स्त्रूं क्ष्मां स्तूं स्ह्रीं थ्प्रीं क्रौं श्रां म्लीं
|ॐ नमश्चण्डिकायैः|ॐ श्री दुर्गार्पणमस्तु||
(१२) ह्रीं ओं श्रीं ईं क्लीं क्रूं श्रूं प्रां स्क्रूं दिं फ्रें हं सः चें सूं प्रीं ब्लूं आं औं ह्रीं क्रीं द्रां श्रीं स्लीं क्लीं स्लूं ह्रीं व्लीं ओं त्त्रों श्रौं ऐं प्रें द्रूं क्लूं औं सूं चें ह्रूं प्लीं क्षीं
|ॐ नमश्चण्डिकायैः|ॐ श्री दुर्गार्पणमस्तु||
(१३) श्रौं व्रीं ओं औं ह्रां श्रीं श्रां ओं प्लीं सौं ह्रीं क्रीं ल्लूं ह्रीं क्लीं प्लीं श्रीं ल्लीं श्रूं ह्रूं ह्रीं त्रूं ऊं सूं प्रीं श्रीं ह्लौं आं ओं ह्रीं
|ॐ नमश्चण्डिकायैः|ॐ श्री दुर्गार्पणमस्तु||
दुर्गा दुर्गर्तिशमनी दुर्गापद्विनिवारिणी |
दुर्गमच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी ||
दुर्गनिहन्त्री दुर्गमापहा |
दुर्गमग्यानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला ||
दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी |
दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता ||
दुर्गमग्यानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी |
दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी ||
दुर्गमासुरसंहन्त्री दुर्गमायुधधारिणी |
दुर्गमाँगी दुर्गमता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी ||
दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्गभा दुर्गदारिणी ||
[३ बार]
|ॐ नमश्चण्डिकायैः|ॐ दुर्गार्पणमस्तु||
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामण्डायै विच्चे | ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः
ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै
ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा ||
|ॐ नमश्चण्डिकायैः|ॐ दुर्गार्पणमस्तु||
🙏 नमः शिवाय् 🙏
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ଶ୍ରୀ ଦୁର୍ଗା ସାପଟାସାଟୀ ବିଜ ମନ୍ତ୍ର ସାଧନା ..
जवाब देंहटाएंଶ୍ରୀ ଦୁର୍ଗା ସାପଟାସାଟୀ ବିଜ ମନ୍ତ୍ର ସାଧନା ..
ଓମ୍ ଶ୍ରୀ ଗଣେଶ ନାମ [11 ଥର]
ଓମ୍ ହ୍ରୋନ୍ ଜୁନ୍ ସାହ ସିଦ୍ଧ ଗୁରୁଭେ ନାମ [11 ଥର]
ଓମ୍ ଦୁର୍ଗା ଦୁର୍ଗା ରାକନି ଥା ଥା ଥା ସ୍ ha ାହା [13 ଥର]
ଓମ୍ ଆମ୍ ହରିମ୍ କ୍ଲିମ୍ ଚାମଣ୍ଡାୟାଇ ଭିଚେ | ଓମ୍ ଗ୍ଲୁନ୍ ହମ୍ କ୍ଲିନ୍ ଜୁନ୍ ସାହା |
ଶିଖା ଶିଖା ଶିଖା ଶିଖା ଶିଖା ଶିଖା
ଆଇନ୍ ହ୍ରିମ୍ କ୍ଲିମ୍ ଚାମୁଣ୍ଡାଇ ଭିଚାଇ |
ଜୱାଲ ହାନ ସାମ ଲାମ Ksh Phat Swaha ||
ନମସ୍ତେ ରୁଦ୍ରରୁପିନିୟା ନମସ୍ତେ ମଧୁମର୍ଡିନୀ | ନାମ କାଟବାହାରିନୀ ନମସ୍ତେ ମହିଷାର୍ଡିନୀ ||
ନମସ୍ତେ ଶୁମ୍ବନ୍ତ୍ରିୟାଇ ଚା ନିଶୁମ୍ବୁସର୍ଗାଟିନୀ | ଜାଗ୍ରତମ୍ ହାଏ ମହାଦେବୀ ଜାପମ୍ ସିଦ୍ଧମ୍ କୁରୁଶଭା ମୋତେ ||
ଅଙ୍କାରୀ ଶ୍ରୀଶ୍ରୀରୁପାୟାଇ ହରିଙ୍କାରୀ ପ୍ରତୀପାଲିକା | क्लींकारी कामरूपिन्याय बीजरूपे नामोस्टूते ||
ଚାମୁଣ୍ଡା ଚନ୍ଦ୍ରଭାଗି ଚା ୟାଇକାରି ଭର୍ଦାୟିନି | ଭିଚେ ଚ ha ବାଡା ନିତ୍ୟମ ନମସ୍ତେ ମନ୍ତ୍ରପୁରୀ ||
धां धीं धूं वागधिश्वरी वागधिश्वरी। | क्रां क्रीं क्रूम | | || ||
ହୁ ହୁ ହୁ ହୁଙ୍କାରପିନୟୀ ଜନ ଜନ ଜମ୍ବନାଡିନି | भ्रं भ्रिं भ्रूं नमः | || ||
अं कं चं क्षं क्षं क्षं | Dhijagran Dhijagran Trotay Trotay Deeptam Kuru Kuru Swaha ||
ପାନ୍ ପିନ୍ ପୁନ୍ ପାର୍ବତୀ ପୂର୍ଣ୍ଣା ଖାନ୍ ଖେନ୍ ଖୁନ୍ ଖେଚାରି ଏବଂ | ସା ସା ସା ସାପ୍ଟାଶତୀ ଦେବ ମନ୍ତ୍ର ମନ୍ତ୍ରସିଡିମ୍ କୁରୁଶଭା ମେ ||
| ଓମ୍ ନାମଶଚଣ୍ଡିକାୟାହ | ଓମ୍ ଶ୍ରୀ ଦୁର୍ଗରପନ୍ମାଷ୍ଟୁ ||
ପ୍ରଥମ ଚରିତ୍ର...
ଓମ୍ ଆସିଆ ଶ୍ରୀ ପ୍ରଥାମୃତ୍ତ୍ରାସୀ ବ୍ରହ୍ମା ush ଷି ମହାକଲି ଦେବତା ଗାୟତ୍ରୀ ଚାନ୍ଦା ନନ୍ଦା ଶକ୍ତି: ରାକଦାନ୍ତିକା ବେଜାମ ଅଗ୍ନିଷ୍ଟଭମ୍ ରୁଗ୍ବେଦା ସ୍ op ରୂପମ୍ ଶ୍ରୀ ମହାକାଲୀ ପ୍ରୀତି ପ୍ରଥାମଚରିତ ଜାପ ଭିନିୟୋଗା |
1) ଲରୁନ୍ ଶ୍ରୁନ୍ ପ୍ରିନ୍ ରନ୍ ଭ୍ରିନ୍ ଭ୍ରିନ୍ ବ୍ଲୁନ୍ ଷ୍ଟ୍ରାଉନ୍ ବ୍ଲାନ୍ ଲୋନ୍ ସାନ୍ ରୋନ୍ ହସନ୍ କ୍ରୁନ୍ ଶନ୍ ଶ୍ରାନ୍ ୱାନ୍ ଟ୍ରୁ କ୍ରୁନ୍ କ୍ଲୁନ୍ କ୍ଲିମ୍ ଶ୍ରୀନ ଭ୍ଲୁନ୍ ଥା ଥ୍ରିନ୍ ଷ୍ଟ୍ରାଉନ୍ ସ୍ଲୁନ୍ କ୍ରାନ୍ କ୍ରାନ୍ ଫ୍ରାନ୍ ଜିନ୍ ଲୋନ୍ ଶ୍ରୁନ୍ ନନ୍ ଷ୍ଟ୍ରି ପ୍ରାଉନ୍ ଷ୍ଟ୍ରୁନ୍ ଜ୍ରାନ୍ ଭନ୍ ଓନ୍ ଶ୍ରାଉନ୍ ରେନ୍ ରୁନ୍ ରୁନ୍
| ଓମ୍ ନାମଶଚଣ୍ଡିକାୟାହ | ଓମ୍ ଶ୍ରୀ ଦୁର୍ଗରପନ୍ମାଷ୍ଟୁ ||
ମଧ୍ୟମ ଚରିତ୍ର..
ॐ अस्य श्री मध्यामचरित्रस्य विनियोगः विनियोगः विनियोगः विनियोगः विनियोगः विनियोगः
(2) लह्रीं श्रंद् द्रुं डुं डुं डुं डुं डुं
| ଓମ୍ ନାମଶଚଣ୍ଡିକାୟାହ | ଓମ୍ ଶ୍ରୀ ଦୁର୍ଗରପନ୍ମାଷ୍ଟୁ ||
(3)
| ଓମ୍ ନାମଶଚଣ୍ଡିକାୟାହ | ଓମ୍ ଶ୍ରୀ ଦୁର୍ଗରପନ୍ମାଷ୍ଟୁ ||
।
| ଓମ୍ ନାମଶଚଣ୍ଡିକାୟାହ | ଓମ୍ ଶ୍ରୀ ଦୁର୍ଗରପନ୍ମାଷ୍ଟୁ ||
ଭଲ ଚରିତ୍ର..
ଓମ୍ ଆସିଆ ଶ୍ରୀ ଉତ୍ତରାଚାର୍ଯ୍ୟ ରୁଦ୍ର ରୁଷୀ: ମହାସାରସ୍ୱତୀ ଦେବ ଅନୁଷ୍ପ ଚାନ୍ଦା ଭୀମା ଶକ୍ତି: ଭ୍ରାମାରି ବେଜାମ ସୂର୍ଯ୍ୟସତ୍ତ୍ୱଭ ସମବେଦ ସ୍ୱରୋପମ୍ ଶ୍ରୀ ମହାସାରସ୍ୱତୀ ପ୍ରୀତି ଉତ୍ତରପ୍ରଦେଶ ଜାପ ଭିନିୟୋଗା:
। ग्लूं छ्रंक्लिं रं क्सैं भूं भूं भूं भूं भूं लूं फ्रून स्थ्रूं ल्थूं फ्रून स्क्रिन स्क्रिन
| ଓମ୍ ନାମଶଚଣ୍ଡିକାୟାହ | ଓମ୍ ଶ୍ରୀ ଦୁର୍ଗରପନ୍ମାଷ୍ଟୁ ||
(6)
| ଓମ୍ ନାମଶଚଣ୍ଡିକାୟାହ | ଓମ୍ ଶ୍ରୀ ଦୁର୍ଗରପନ୍ମାଷ୍ଟୁ ||
(୭)
| ଓମ୍ ନାମଶଚଣ୍ଡିକାୟାହ | ଓମ୍ ଶ୍ରୀ ଦୁର୍ଗରପନ୍ମାଷ୍ଟୁ ||
(8) लही ग्लौन ह्रौन स्ल्ल्रीं स्ल्ल्रीं स्ल्ल्रीं स्ल्ल्रीं स्ल्ल्रीं
| ଓମ୍ ନାମଶଚଣ୍ଡିକାୟାହ | ଓମ୍ ଶ୍ରୀ ଦୁର୍ଗରପନ୍ମାଷ୍ଟୁ ||
(9)
| ଓମ୍ ନାମଶଚଣ୍ଡିକାୟାହ | ଓମ୍ ଶ୍ରୀ ଦୁର୍ଗରପନ୍ମାଷ୍ଟୁ ||
(୧୦)
| ଓମ୍ ନାମଶଚଣ୍ଡିକାୟାହ | ଓମ୍ ଶ୍ରୀ ଦୁର୍ଗରପନ୍ମାଷ୍ଟୁ ||
(11) प्लीं क्ष्मक्लीं त्स्रां प्रम म्लीं म्लीं म्लीं
| ଓମ୍ ନାମଶଚଣ୍ଡିକାୟାହ | ଓମ୍ ଶ୍ରୀ ଦୁର୍ଗରପନ୍ମାଷ୍ଟୁ ||
(୧୨)
| ଓମ୍ ନାମଶଚଣ୍ଡିକାୟାହ | ଓମ୍ ଶ୍ରୀ ଦୁର୍ଗରପନ୍ମାଷ୍ଟୁ ||
(୧୩)
| ଓମ୍ ନାମଶଚଣ୍ଡିକାୟାହ | ଓମ୍ ଶ୍ରୀ ଦୁର୍ଗରପନ୍ମାଷ୍ଟୁ ||
ଦୁର୍ଗା ଦୁର୍ଗାଟିଶମାନି ଦୁର୍ଗାପଦ୍ଭିନିଭାରିନି |
ଦୁର୍ଗାମେଖେଦିନି ଦୁର୍ଗାସାଧିନୀ ଦୁର୍ଗାସିନା ||
ଦୁର୍ଗାନିହନ୍ତ୍ରୀ ଦୁର୍ଗାମାପାହା ।
ଦୁର୍ଗାମେଗାନଡା ଦୁର୍ଗାଦିତ୍ୟଲୋକାଦାଭାନ୍ଲା ||
ଦୁର୍ଗା ଦୁର୍ଗାମାଲୋକା ଦୁର୍ଗାମେଟମାଭାରୁପିନି |
ଦୁର୍ଗାମରଗାପଡା ଦୁର୍ଗାଭିଡ଼ିଆ ଦୁର୍ଗାଶ୍ରୀ ||
ଦୁର୍ଗାମାଗିୟାନସଥାନା ଦୁର୍ଗାମାଧ୍ୟାୟନାଭାସିନି | |
ଦୁର୍ଗାମୋହା ଦୁର୍ଗାମାଗା ଦୁର୍ଗାମାର୍ଥସ୍ୱାରୋପିନି ||
ଦୁର୍ଗାମାସୁରାସମନ୍ତ୍ରି ଦୁର୍ଗାମୟୁଧରିନି |
ଦୁର୍ଗାମଙ୍ଗୀ ଦୁର୍ଗାମେଟା ଦୁର୍ଗାମ୍ୟା ଦୁର୍ଗାମେଶ୍ୱରୀ ||
ଦୁର୍ଗାଭିମା ଦୁର୍ଗାବାମା ଦୁର୍ଗା ଦୁର୍ଗାଧାରୀ ||
[୩ ଥର]
| ଓମ୍ ନମାଶଚଣ୍ଡିକାୟାଇ | ଓମ୍ ଦୁର୍ଗରପନ୍ମାଷ୍ଟୁ ||
ଓମ୍ ଆମ୍ ହରିମ୍ କ୍ଲିମ୍ ଚାମଣ୍ଡାୟାଇ ଭିଚେ | ଓମ୍ ଗ୍ଲୁନ୍ ହମ୍ କ୍ଲିନ୍ ଜୁନ୍ ସାହା |
ଶିଖା ଶିଖା ଶିଖା ଶିଖା ଶିଖା ଶିଖା
ଆଇନ୍ ହ୍ରିମ୍ କ୍ଲିମ୍ ଚାମୁଣ୍ଡାଇ ଭିଚାଇ |
ଜୱାଲ ହାନ ସାମ ଲାମ Ksh Phat Swaha ||
| ଓମ୍ ନମାଶଚଣ୍ଡିକାୟାଇ | ଓମ୍ ଦୁର୍ଗରପନ୍ମାଷ୍ଟୁ ||
🙏 ନମଃ ଶିବାୟ 🙏